Pothole Problem in India: जब सड़क का गड्ढा जनता की आवाज़ बन गया

  • July 5, 2025

हर साल बरसात आती है, और उसके साथ भारत में pothole problem यानी सड़कों पर गड्ढों की समस्या भी बढ़ जाती है। हम सबने कभी न कभी इसका सामना किया है। कभी ऑफिस जाते समय बाइक का टायर गहरे गड्ढे में धँस जाता है, कभी पैदल चलते वक्त अचानक पाँव मुड़ जाता है, तो कभी गाड़ी का टायर फट जाता है। पहले हम चुपचाप सह लेते थे, लेकिन अब लोग सवाल पूछने लगे हैं।

यह pothole problem in India इतनी आम क्यों है?

देश के अधिकतर शहरों में बारिश के बाद सड़कें टूट जाती हैं। चाहे वो महानगर हों या छोटे कस्बे, हालात कमोबेश एक जैसे हैं। टेंडर पास होते हैं, बजट निकलता है, सड़क बनती है — और फिर कुछ महीनों में ही गड्ढों में बदल जाती है।

हर गड्ढा एक ही सवाल पूछता है:
“ये सड़क कितने पैसे में बनी थी, और किसने बनाई थी?”

लोगों के मन में अब यही सवाल उठते हैं, और यहीं से बदलाव की शुरुआत होती है।

पहले लोग सहते थे, अब pothole problem पर सवाल करते हैं

काफी लंबे समय तक लोगों ने इसे अपनी किस्मत मान लिया था।
लेकिन अब लोग RTI फाइल कर रहे हैं, सोशल मीडिया पर फोटो डाल रहे हैं, और सीधे नगर निगम, पार्षद या MLA को टैग कर रहे हैं।

इस बदलाव की वजह सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं है, बल्कि नागरिकों की बढ़ती जागरूकता है।

पुणे की pothole problem में स्थानीय पहल और सोशल मीडिया का असर

पुणे में PMC ने दावा किया कि उन्होंने 2700 से ज़्यादा गड्ढों की मरम्मत कर ली है (स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स)।

लेकिन ज़मीनी हकीकत ये है कि रोज़ाना सफर करने वाले अब भी परेशान हैं।

एक यूट्यूबर संतोष पंडित ने गड्ढों पर रंगोली बनाकर लोगों का ध्यान खींचा। उनके रील्स को 19 मिलियन से ज़्यादा बार देखा गया। इसका असर ये हुआ कि नगर निगम को उन जगहों पर काम करवाना पड़ा, जहाँ पहले सिर्फ शिकायतें की जाती थीं।

‘गड्ढा बचाओ’ जैसे अभियान

अजय आदकर नाम के एक नागरिक ने रात में गड्ढों को कार्डबोर्ड और सफेद बैग से मार्क करना शुरू किया, ताकि लोग दिन में उन्हें देख सकें और दुर्घटना से बच सकें।

ये काम ना कोई मीडिया कवरेज चाहता है, ना कोई सेल्फी — सिर्फ समाज के लिए किया गया एक छोटा-सा प्रयास है, जो बहुत असरदार है।

सोशल मीडिया और तकनीक ने pothole problem in India को जनता का हथियार बनाया

आज के दौर में सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जवाबदेही तय करने का औजार बन चुका है।

लोग ट्विटर पर #SelfieWithPotholes चला रहे हैं।
कुछ लोग Instagram Reels में गड्ढों को लेकर व्यंग्य बना रहे हैं।
Facebook ग्रुप्स में कॉलोनी के लोग सामूहिक शिकायत भेज रहे हैं।

इन सबके पीछे एक ही मकसद है —
“अब और नहीं, गड्ढे भरवाओ।”

कुछ और शहरों की मिसाल

मुंबई की सांसद सुप्रिया सुले ने खुद pothole के साथ सेल्फी लेकर अभियान को बढ़ावा दिया।

नागपुर में ट्विटर पर शिकायत करने के बाद @ngpnmc को टैग किया गया, और अगले ही दिन काम शुरू हुआ।

गुरुग्राम में कॉलोनी के लोगों ने WhatsApp पर फोटो भेजकर शिकायत की और 3 दिन में कार्रवाई हुई।

सिविक टेक्नोलॉजी की मदद

PCMC ने एक एप लॉन्च किया — ‘Pothole Management App’, जिसमें कोई भी नागरिक गड्ढे की लोकेशन और फोटो भेज सकता है। अधिक जानकारी के लिए देखें: PCMC Official Website

 नगरपालिका ने दावा किया है कि 8 दिनों के भीतर वह उस लोकेशन पर कार्य करते हैं।

IMC पुणे ग्रुप ने ‘Pothole Walk’ का आयोजन किया जिसमें 160 गड्ढों को चिन्हित कर डिटेल रिपोर्ट बनाई गई।

इन सबके जरिए साफ़ हो गया है कि टेक्नोलॉजी अगर सही हाथों में हो, तो real change लाया जा सकता है।

सरकार कब सुनती है?

बहुत बार ऐसा होता है कि शिकायतें अनसुनी कर दी जाती हैं। कॉल्स unanswered रहती हैं, पोर्टल पर status “under review” में अटका रहता है।

लेकिन जब:

  1. RTI डाली जाती है,
  2. 10 लोग मिलकर शिकायत भेजते हैं,
  3. लोकल मीडिया में खबर छपती है,
  4. या फिर सोशल मीडिया पर टैगिंग होती है

तब ज़्यादातर मामलों में प्रशासन एक्शन लेने पर मजबूर हो जाता है।

जब चुनाव पास आते हैं

अक्सर देखा गया है कि जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आते हैं, गड्ढे भरने का काम तेज़ हो जाता है।
लोग अब जान चुके हैं कि गड्ढा भी एक राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

ट्विटर पर एक नागरिक ने लिखा:
“ये गड्ढा हमारे घर के सामने पिछले 2 साल से है, लेकिन अब नेताजी आए और इसे भरवा दिया — चुनाव आ गया है शायद।”

यह तंज नहीं, बल्कि एक हकीकत है।

क्या कर सकते हैं आप?

अगर आपके घर के सामने, ऑफिस के रास्ते में, या स्कूल के पास कोई गड्ढा है — तो आप सिर्फ गुस्सा ना करें। आप कुछ कर सकते हैं:

  1. गड्ढे की फोटो खींचें
  2. नगर निगम के पोर्टल पर शिकायत करें
  3. RTI डालें
  4. सोशल मीडिया पर फोटो और लोकेशन टैग करें
  5. कॉलोनी ग्रुप में सबको जोड़ें और सामूहिक शिकायत भेजें
  6. लोकल मीडिया को ईमेल करें या ट्वीट करें

आप बदलाव का हिस्सा बन सकते हैं

हर गड्ढा आपको तकलीफ देता है, लेकिन हर गड्ढा एक मौका भी है —
एक बेहतर शहर, बेहतर प्रशासन और बेहतर जवाबदेही का।

अगर आपने कभी pothole की शिकायत की है, और उसका समाधान हुआ है — तो वह कहानी शेयर करें।
अगर आप किसी NGO से जुड़े हैं जो सड़क सुरक्षा पर काम करता है — उन्हें टैग करें।

आप रील्स बना सकते हैं, ब्लॉगर हैं तो अपने अनुभव लिख सकते हैं, या सिर्फ सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल सकते हैं।

छोटे कदम, बड़ा असर डालते हैं।

निष्कर्ष: pothole problem in India अब सिर्फ सड़क का छेद नहीं

आज pothole problem in India सिर्फ एक सड़क की ख़राब हालत नहीं है।
यह एक संकेत है कि नागरिक अब जागरूक हो चुके हैं, और सरकार से सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जवाबदेही भी मांग रहे हैं।

गड्ढा अब एक मुद्दा है — एक ऐसा मुद्दा, जो हमारे वोट, हमारी आवाज़ और हमारे शहर की सूरत को बदल सकता है।

अगर आपके पास भी कोई अनुभव है, तो नीचे कमेंट करके ज़रूर बताएं। हो सकता है आपकी कहानी किसी और के लिए हिम्मत बन जाए।

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